शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। आज के छात्र ही कल के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और नेता बनेंगे, और उनकी इस नींव को मजबूत करने का श्रेय पूरी तरह से शिक्षकों को जाता है। वे हमें अनुशासन, नैतिकता और धैर्य का पाठ पढ़ाते हैं।
हार न मानना कभी जीवन में, यह साहस जगाते हो। मिट्टी को सोने में बदले, ऐसी आपकी पारस वाणी, धन्य हुए हम पाकर तुमको, गुरुवर की है मेहरबानी। ऐसी आपकी पारस वाणी
शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रस्तुत है कौशल जी द्वारा रचित एक भावपूर्ण कविता, जो शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाती है। यह कविता बच्चों के लिए भी अत्यंत सरल और प्रभावशाली है। धन्य हुए हम पाकर तुमको
एक बच्चे के जीवन में माता-पिता के बाद शिक्षक का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है। जहाँ माता-पिता हमें जीवन देते हैं, वहीं शिक्षक हमें उस जीवन को जीने का सही तरीका और उद्देश्य सिखाते हैं। कौशल जी की कविता के अनुसार, शिक्षक वह प्रकाश पुंज है जो अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर ज्ञान की रोशनी फैलाता है। कभी ममता की छाँव मिली
क्या आप इस कविता में किसी या विद्यालय के कार्यक्रम के लिए भाषण (Speech) की रूपरेखा चाहते हैं?
सही गलत की पहचान करा, जीवन का वरदान दिया। कभी डाँट में प्यार छिपा, कभी ममता की छाँव मिली, आपकी शिक्षा की बगिया में, हम नन्हीं कलियाँ खिलीं।
भूल न पाएँगे जीवन भर, गुरु के प्यारे मूल हम। कौशल कहे कि युग-युगांतर, आपका नाम अमर रहे, हर शिष्य के दिल में शिक्षक, बनकर एक प्रखर रहे।
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